परिचय:
यह केंद्र जुलाई, 2012 में भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE), देहरादून (जो भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त निकाय है) के अधीन क्षेत्रीय वन अनुसंधान संस्थान (RFRI), जोरहाट की एक इकाई के रूप में अस्तित्व में आया। यह ICFRE के अंतर्गत देश के विभिन्न भागों में कार्यरत 9 संस्थानों एवं 5 केंद्रों में नवीनतम है। यह उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में RFRI, जोरहाट के अंतर्गत स्थापित दो केंद्रों में से एक है, जबकि दूसरा केंद्र ARCBR, आइजोल है।
दायित्व (Mandate):
1- वन-आधारित आजीविका के क्षेत्र में वन-निर्भर समुदायों की क्षमता निर्माण।
2- वन संसाधनों के संरक्षण एवं सतत उपयोग हेतु उपलब्ध प्रौद्योगिकियों/प्रक्रियाओं/उपकरणों का उपयोगकर्ता समूहों तक प्रसार।
3- अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत अनुसंधान, शिक्षा एवं विस्तार गतिविधियों में प्रमुख संस्थान को सहयोग प्रदान करना।
मुख्य अनुसंधान क्षेत्र:
1- वानिकी एवं प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन (NRM) तकनीकों के अनुप्रयोग द्वारा सतत आजीविका के वैकल्पिक साधन।
2- बांस क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास, जिसमें प्रवर्धन, संरक्षण तथा मूल्य संवर्धन शामिल है।
3- उत्पादकता वृद्धि हेतु ऑन-फार्म सहभागी अनुसंधान।
4- कौशल प्रशिक्षण एवं प्रौद्योगिकी प्रदर्शन का प्रभाव मूल्यांकन।
5- जैव विविधता संरक्षण।
भौगोलिक अधिकार क्षेत्र:
सिक्किम सहित उत्तर-पूर्वी राज्य (भारत)
प्रमुख उपलब्धियां: (विवरण देखने के लिए लिंक पर क्लिक करें)
1- अनुसंधान
1 - त्रिपुरा के ग्रामीण क्षेत्रों में कम लागत वाली बांस उपचार तकनीक का प्रचार-प्रसार:
CFLE द्वारा त्रिपुरा राज्य में बांस उपचार तकनीक एवं बांस संरक्षण प्रक्रिया पर लगभग 15 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें कुल 360 प्रतिभागियों ने भाग लिया। ये प्रशिक्षण बामुटिया, नोआगांव, बोरजुश, खासचौमुखानी, कंचनपुर एवं अगरतला में आयोजित किए गए। बाउचेरी मशीन को राज्य के विभिन्न भागों में कई समूहों द्वारा अपनाया गया है। ये मशीनें नियमित रूप से उपयोग में लाई जा रही हैं और उपयोगकर्ता उपचारित बांस के माध्यम से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष आय अर्जित कर रहे हैं। CFLE ने राज्य के विभिन्न स्थानों पर लघु स्तर की बांस उपचार एवं प्रौद्योगिकी प्रदर्शन इकाइयों की स्थापना हेतु विभिन्न कारीगर समूहों को सहयोग प्रदान किया है।
बांस उपचार तकनीकों का व्यावसायीकरण एवं उद्यमिता विकास -
हाल ही में, अगरतला (त्रिपुरा) स्थित सामाजिक उद्यम त्रिपुरा बांस एवं बेंत विकास केंद्र (TRIBAC) ने बाउचेरी मशीन तथा कम लागत वाले उपचार टैंकों के माध्यम से न्यूनतम पूंजी निवेश के साथ उपचारित बांस उत्पादन इकाई की स्थापना की पहल की है। CFLE के तकनीकी सहयोग से TRIBAC ने ‘TryBam’ ब्रांड के अंतर्गत विभिन्न व्यावसायिक उपयोगों हेतु अलग-अलग प्रजातियों के उपचारित बांस विकसित किए हैं। CFLE के साथ सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए TRIBAC नए उद्यमियों की क्षमता निर्माण हेतु प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन आयोजित कर रहा है तथा आवास, फर्नीचर एवं घरेलू बाड़बंदी हेतु उपचारित बांस के विपणन में भी संलग्न है। बांस उपचार की प्रोटोटाइप मशीन का विस्तार TRIBAC द्वारा बिहार, मेघालय एवं त्रिपुरा में भी किया गया है। यह गरीब-हितैषी बांस उपचार तकनीक त्रिपुरा के कंचनपुर, मेलाघर एवं बामुटिया जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण एवं बाड़बंदी के लिए उपचारित बांस के उत्पादन हेतु विस्तारित की गई है। भूकंप संभावित क्षेत्रों में आपदा जोखिम न्यूनीकरण के अतिरिक्त, यह प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के अंतर्गत गुणवत्तापूर्ण बांस निर्माण घटकों की आपूर्ति हेतु बांस उपचार इकाइयों की स्थापना के माध्यम से ग्रामीण गरीबों के लिए वैकल्पिक आजीविका भी सृजित करेगी। यह माना जाता है कि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में जागरूकता सृजन एवं सामुदायिक उद्यमिता विकास से निकट भविष्य में उपचारित बांस की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा साथ ही संसाधन उपभोग में भी कमी आएगी। अतः CFLE स्थानीय गैर-सरकारी संगठनों एवं स्वयंसेवी समूहों के सहयोग से इसे और अधिक विस्तार देने की योजना बना रहा है।
2- विस्तार
1 - त्रिपुरा के ग्रामीण क्षेत्रों में कम लागत वाली बांस उपचार तकनीक का प्रचार-प्रसार:
पश्चिम त्रिपुरा एवं उत्तर त्रिपुरा में लाभार्थियों द्वारा उत्पादित वर्मी कम्पोस्ट की बिक्री के माध्यम से आजीविका संवर्धन हेतु बाजार संपर्क विकसित किए गए। कम लागत वाली वर्मी कम्पोस्टिंग तकनीकों की उच्च आय क्षमता से प्रेरित होकर स्थानीय युवाओं ने बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उद्देश्य से वर्मी कम्पोस्ट इकाइयां स्थापित की हैं। CFLE ने उत्पादक समूहों का गठन कर बामुटिया एवं कंचनपुर में अनेक वर्मी कम्पोस्ट इकाइयां स्थापित की हैं। अगरतला स्थित MAS एग्रोकेमिकल्स ने वर्मी कम्पोस्ट उत्पादक किसानों के साथ समझौता कर ‘FASAL’ ब्रांड नाम से उत्पादों का संकलन एवं विपणन किया है। यह एजेंसी जैविक खेती हेतु वर्मी कम्पोस्ट की आपूर्ति के लिए विभिन्न रोपण एजेंसियों के साथ भी अनुबंधित है।
2 - बांस नर्सरी का संवर्धन:
CFLE त्रिपुरा में बांस नर्सरियों को बढ़ावा दे रहा है ताकि बांस रोपण सामग्री की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके। लगभग 110 युवा एवं किसान प्रत्यक्ष रूप से बांस पौध उत्पादन में संलग्न हैं। प्रशिक्षित नर्सरी उत्पादक उत्तर-पूर्वी राज्यों के बाहर भी विभिन्न एजेंसियों एवं विभागों को गुणवत्तापूर्ण बांस पौधों की आपूर्ति कर आय अर्जित कर रहे हैं।
3 - हर्बल गार्डन का संवर्धन:
CFLE ने कंचनपुर के 55 जनजातीय वैद्यों को सहायता प्रदान कर वैद्यराज हर्बल ग्रोअर्स सोसायटी का गठन किया है, जिसके माध्यम से उत्तर त्रिपुरा में 10 हर्बल गार्डन स्थापित किए गए हैं। इस सोसायटी ने कम से कम 500 औषधीय पौधों का ज्ञान आधार एवं भंडार विकसित करने की योजना बनाई है।
पता-
प्रमुख
वन आजीविका विस्तार हेतु वन अनुसंधान केंद्र, अगरतला
अगरतला शाल बागान वन परिसर, गांधीग्राम, अगरतला, त्रिपुरा - 799012
फोन - +91-3812397097
ईमेल - head_frcle@icfre.org