अनुसंधान निदेशालय
परिचय
अनुसंधान निदेशालय का नेतृत्व उप महानिदेशक (अनुसंधान) करते हैं और उन्हें दो सहायक महानिदेशक (अनुसंधान योजना), सहायक महानिदेशक (निगरानी एवं मूल्यांकन) और कई वैज्ञानिकों का सहयोग प्राप्त है। निदेशालय यह सुनिश्चित करता है कि आईसीएफआरई संस्थानों द्वारा शुरू की गई सभी अनुसंधान परियोजनाएं आवश्यकता आधारित हों और क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय वानिकी अनुसंधान समस्याओं का समाधान करें। निदेशालय द्वारा अनुसंधान प्राथमिकताओं का निर्धारण सभी हितधारकों और अंतिम उपयोगकर्ताओं को शामिल करते हुए सहभागितापूर्ण तंत्र के माध्यम से किया जाता है। अनुसंधान समस्याओं के समग्र समाधान और कार्यों के दोहराव से बचने के लिए, आईसीएफआरई ने कुछ उभरते विषयों पर और महत्वपूर्ण वानिकी प्रजातियों को शामिल करते हुए अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (एआईसीआरपी) शुरू की है।
1- अनुसंधान योजना प्रभाग:
निदेशालय का अनुसंधान योजना प्रभाग, आईसीएफआरई के अनुसंधान कार्यक्रम की योजना बनाने, उसे संसाधित करने, तैयार करने और अंतिम रूप देने का कार्य करता है, जिसमें आईसीएफआरई के सभी संस्थानों की अनुसंधान योजनाओं के अनुरूप चल रही अनुसंधान परियोजनाओं की समीक्षा भी शामिल है। प्रतिवर्ष, अनुसंधान योजना प्रभाग, आईसीएफआरई के महानिदेशक की अध्यक्षता में संस्थान स्तर पर अनुसंधान सलाहकार समूह की बैठकों और आईसीएफआरई मुख्यालय में अनुसंधान नीति समिति की बैठकों का समन्वय करता है।
यह राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और राज्य स्तरीय अनुसंधान आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाए रखता है और साथ ही समाज की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले वानिकी अनुसंधान और उभरती जरूरतों में निवेश सुनिश्चित करता है। अनुसंधान योजना विभाग वानिकी अनुसंधान में नवीनतम रुझानों के आलोक में समग्र समन्वय का कार्य करता है।
2- निगरानी एवं मूल्यांकन प्रभाग:
यह विभाग ICFRE की सभी चल रही अनुसंधान परियोजनाओं की निगरानी करता है और समय पर पूरा करने, प्रस्तावित उद्देश्यों को प्राप्त करने और अनुसंधान की गुणवत्ता में सुधार के लिए सुधारात्मक उपाय सुझाता है। परियोजना समापन रिपोर्ट का मूल्यांकन और ICFRE संस्थानों में आवधिक सेमिनारों का आयोजन भी इसी विभाग द्वारा समन्वित किया जाता है।
जनादेश
अनुसंधान निदेशालय को अनुसंधान समस्याओं के समाधान के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाने और अनुसंधान कार्यों के दोहराव से बचने के लिए विशिष्ट पहचान प्राप्त है। आईसीएफआरई ने कुछ उभरते विषयों और महत्वपूर्ण वानिकी प्रजातियों पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजनाएं (एआईसीआरपी) शुरू की हैं। निदेशालय के विभाग आईसीएफआरई के अनुसंधान कार्यक्रम के समन्वय में एक दूसरे के पूरक हैं।
अनुसंधान योजना
1- आरएजी के कैलेंडर बनाना
2- संस्थानों में अनुसंधान समूह बैठकों (आरएजी) के संचालन में समन्वय स्थापित करना।
3- आरपीसी बैठक आयोजित करने के लिए
4- संस्थानों को नए अनुसंधान परियोजनाओं की स्वीकृति की सूचना देना।
5- नए अनुसंधान परियोजनाओं के लिए अनुवर्ती कार्रवाई करना और अंतिम स्वीकृति देना।
निगरानी और मूल्यांकन
1. आईसीएफआरई संस्थानों की सभी चल रही अनुसंधान परियोजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन करना तथा समय पर पूरा करने और प्रस्तावित उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए सुधारात्मक उपायों का सुझाव देना।
2. आईसीएफआरई दिशा-निर्देशों के अनुसार योजना परियोजनाओं की परियोजना समापन रिपोर्टों (पीसीआर) का मूल्यांकन।
3. अनुसंधान की गुणवत्ता में सुधार और उसके विस्तार के लिए आईसीएफआरई संस्थानों में आवधिक संगोष्ठी का आयोजन।
नई पहल:
1- आरआईएमएस (अनुसंधान सूचना प्रबंधन प्रणाली)
2- आरआईएमएस (अनुसंधान सूचना प्रबंधन प्रणाली)
3- राष्ट्रीय वानिकी अनुसंधान योजना (एनएफआरपी)
4- आवधिक सेमिनार
5- परियोजना मूल्यांकन समिति (PEC) द्वारा PCR का मूल्यांकन
6- निगरानी तंत्र का विकास
7- ICFRE की बौद्धिक संपदा अधिकार नीति
8- महत्वपूर्ण वानिकी प्रजातियों की विविधता का विमोचन
9- क्षेत्रीय अनुसंधान सम्मेलन (आरआरसी)
10- अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजनाओं के लिए दिशानिर्देश 2017
11- आईसीएफआरई निदेशकों का सम्मेलन
12-बीटीएसजी-आईसीएफआरई (एनबीएम द्वारा समर्थित)
13- प्रमुख भारतीय नदियों के डीपीआर तैयार किए गए
14- पारिस्थितिक स्थिरता और उत्पादकता वृद्धि के लिए वानिकी अनुसंधान को सुदृढ़ बनाना: व्यापक अनुसंधान विस्तार एवं शिक्षा योजना। राष्ट्रीय प्राधिकरण CAMPA द्वारा समर्थित।
15- उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में वन अग्नि के कारण प्रति हेक्टेयर वास्तविक आधार पर आर्थिक नुकसान का आकलन: राष्ट्रीय प्राधिकरण CAMPA द्वारा समर्थित योजना।
1- प्रकाशन:
1- भारत में बांस के संरक्षण, प्रबंधन और उपयोग पर एक स्थिति रिपोर्ट
2- भारत के वनों में पाई जाने वाली महत्वपूर्ण आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ: स्थिति और प्रबंधन, आईसीएफआरई, सितंबर 2019
3- भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद द्वारा विकसित कृषि वानिकी मॉडल, 2020
4- भारत में औषधीय पौधे: उनकी मांग और आपूर्ति का आकलन
2- कार्यवाही प्रकाशित:
1- आरपीसी कार्यवाही
2- उच्च ऊंचाई वाले औषधीय पौधों पर कार्यशाला की कार्यवाही
3- महत्वपूर्ण हाई लाइट्स:
1- कोयंबटूर स्थित IFGTB, देहरादून स्थित FRI और जबलपुर स्थित TFRI से जारी की गई किस्में
2- आईसीएफआरई विजन 2030
लोग
| डॉ. एच.एस. गिनवाल |
| श्री एलन चोंग टेरोन, आईएफएस |
| डॉ. पी.एस. रावत |
| सुश्री इस्मिता नौटियाल |
| Dr. Jawaid Ashraf |
| डॉ. शैलेंद्र कुमार |
| डॉ. अनुग्रह त्रिपाठी |
संपर्क
डॉ. एच.एस. गिनवाल
उप महानिदेशक (अनुसंधान)
भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद
डाकघर, न्यू फॉरेस्ट, देहरादून
(Uttarakhand) - INDIA
पिन कोड: 248006
फ़ोन: +91-135-2757775 (कार्यालय), एक्सटेंशन नंबर. 0135-222-4836
फैक्स : +91-135-2757775
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अंतिम बार समीक्षा और अद्यतन की तिथि: 30 Sep 2025
