Wednesday, 18 Feb, 2026 05:45:53 AM

भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद

Indian Council of Forestry Research and Education

पूर्ण परियोजनाएँ

वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून

मार्च 2016

1- राष्ट्रीय वन कीट संग्रह (NFIC) में उपलब्ध यूलोफिडी (Eulophidae) कुल (हाइमेनोप्टेरा: चाल्सिडोइडिया) के वर्गिकी (टैक्सोनॉमी) पर अध्ययन, दून घाटी को छोड़कर

2- हरे खड़े बांस को क्षति पहुँचाने वाले हिस्पाइन बांस छेदक कीट Estigmena chinensis Hope (कोलियोप्टेरा: क्राइसॉमेलिडी) की जीवविज्ञान एवं प्रबंधन पर अध्ययन

3- पंजाब और हरियाणा से अंड परजीवी ततैया Trichogramma spp. की विविधता पर अध्ययन तथा महत्वपूर्ण वन कीटों के जैविक नियंत्रण में उनका उपयोग

4- पंजाब और उत्तराखंड की क्षतिग्रस्त भूमि में कृषि वानिकी (एग्रोफॉरेस्ट्री) मॉडल का विकास

5- शीतलन टावरों में उपचारित लकड़ी (ZiBOC, CCB एवं CCA) के प्रदर्शन एवं उनकी प्राकृतिक स्थायित्व पर अध्ययन

6- Melia composita की कार्य गुणवत्ता एवं फिनिशिंग पहलुओं पर अध्ययन

7- विभिन्न कृषि-जलवायु परिस्थितियों में ZiBOC उपचारित आयातित लकड़ी के प्रदर्शन पर अध्ययन

8- Melia composita के लॉप्स एवं टॉप्स से कंपोज़िट का विकास

9- पॉपलर के लॉप्स एवं टॉप्स से मध्यम घनत्व फाइबर बोर्ड (MDF) का विकास

10- उत्तराखंड हिमालय के चयनित औषधीय पौधा संरक्षण क्षेत्रों (MPCAs) के संवर्धन हेतु उपयुक्त मॉडल का विकास

11- साल (Shorea robusta) वनों के पुनर्जनन में एलीलोपैथिक क्षमता का अध्ययन

मार्च 2017

1- वन अनुसंधान संस्थान के हरबेरियम (देहरादून हरबेरियम) का डिजिटलीकरण (अवधि: 5 वर्ष)

2- दुर्लभ एवं संकटग्रस्त प्रजातियाँ – भारत की चयनित दुर्लभ एवं संकटग्रस्त प्रजातियों की सूचीकरण, विशेषण एवं संरक्षण रणनीतियों पर अखिल भारतीय समन्वित परियोजना (AICP)

3- ल्यूटिओलिन के नए स्रोतों की खोज हेतु चयनित जंगली खाद्य पौधों की फाइटोकेमिकल स्क्रीनिंग

4- Agave sisalana से उच्च गुणवत्ता फाइबर निष्कर्षण एवं जैव-सक्रिय घटकों के सर्वोत्तम पृथक्करण हेतु प्रक्रिया परिष्करण

5- Pinus roxburghii की सुइयों का मूल्य संवर्धित उत्पादों के लिए उपयोग

6- Acacia tortilis के गोंद स्राव की संरचनात्मक अध्ययन एवं उपयोग

7- प्राकृतिक रंग (डाई) के विकास हेतु कवक संसाधनों की खोज



उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान, जबलपुर

आईसीएफआरई द्वारा वित्तपोषित परियोजनाएँ

2015-16

1- साल (Sal) की हार्टवुड बेधक कीट Hoplocerambyx spinicornis Newman की स्थिति एवं उसका प्रबंधन।

2- कीट जैव-नियंत्रण कारक Chrysoperla carnea तथा कीट भक्षक के रूप में उसकी संभावनाओं पर अध्ययन।

3- छत्तीसगढ़ में सर्वोत्तम स्रोतों की पहचान हेतु Madhuca indica J. F. Gmel के जर्मप्लाज्म का संग्रह एवं फाइटोकेमिकल मूल्यांकन।

4- Schleichera oleosa (कुसुम) फलों के पोषण मूल्य का मूल्यांकन तथा स्थानीय लोगों के आर्थिक विकास हेतु मूल्य संवर्धित उत्पादों का विकास।

5- मालकांगनी (Celastrus paniculatus), बहेड़ा (Terminalia belerica) एवं बैविदांग (Embelia tsjeriam-cottam) के फलों/बीजों की प्रसंस्करण एवं भंडारण तकनीकों का मानकीकरण।

2016-17

6- सागौन (Teak) बीज बागानों में बीज उत्पादन पर मधुमक्खियों के परिचय के प्रभाव पर अध्ययन।

7- मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के वृक्षारोपण क्षेत्रों में Gmelina की मृत्यु के कारणों तथा उनके समेकित प्रबंधन पर अध्ययन।

8- मध्य भारत में जर्मप्लाज्म के चयन एवं मूल्यांकन के माध्यम से Dalbergia latifolia Roxb. का आनुवंशिक सुधार।

9- उप-परियोजना 1:- Dalbergia latifolia के प्लस वृक्षों का सर्वेक्षण एवं चयन तथा प्रोजेनी परीक्षणों की स्थापना।

10- उप-परियोजना 2:- उन्नत रोपण सामग्री के उत्पादन हेतु Dalbergia latifolia के विद्यमान माइक्रो-प्रोपेगेशन प्रोटोकॉल का परिष्करण।

11- मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ से अत्यंत संकटग्रस्त Litsea glutinosa के जर्मप्लाज्म का संग्रह एवं आकारिक-आणविक (मॉर्फो-मॉलिक्यूलर) विशेषण।

12- चार महत्वपूर्ण उष्णकटिबंधीय प्रजातियों—Bridelia retusa, Sterculia urens, Boswellia serrata एवं Saraca indica—की अंकुरण, संग्रहण तथा अधिकतम जीवनीयता बनाए रखने की तकनीकों का मानकीकरण।

 

बाह्य रूप से वित्तपोषित परियोजनाएँ

2015-16

1- महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में सिल्वी-एग्री-मेडिसिनल एवं एग्री-मेडिसिनल प्रणालियों का विकास।

2- ताडोबा राष्ट्रीय उद्यान के बफर एवं संक्रमण क्षेत्रों में पाई जाने वाली संकटग्रस्त औषधीय पौध प्रजातियों की जनसंख्या गतिकी।

3- कुछ औषधीय पौधों में प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट घटकों की प्राप्ति हेतु उनकी कटाई के उपयुक्त समय पर अध्ययन।

2016-17

4- इन-विट्रो एवं बीज से उगाए गए Rauvolfia serpentina Benth. की कुछ उच्च उपज देने वाली जीनोटाइप्स में रेसर्पीन (Reserpine) की मात्रा में विविधता पर अध्ययन।

2017-18 (सितंबर 2017 तक)

5- मध्य प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में प्रचलित लोक चिकित्सा में औषधीय जड़ी-बूटियों के उपयोग की सीमा पर अध्ययन एवं स्वदेशी ज्ञान का प्रलेखन।

6- मध्य प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में प्रचलित लोक चिकित्सा में औषधीय जड़ी-बूटियों के उपयोग की सीमा पर अध्ययन एवं स्वदेशी ज्ञान का प्रलेखन।

7- जैव-उर्वरक (बायोफर्टिलाइज़र) संघ (कंसोर्टियम) का निर्माण एवं वन विभाग को उनका वितरण।

 

शुष्क वन अनुसंधान संस्थान, जोधपुर

2015-2017

1- पश्चिमी राजस्थान (उदयपुर) में जलवायु परिवर्तन के प्रति शमन एवं अनुकूलन पर MPOWER कार्यक्रम के प्रभाव का अध्ययन। AFRI-09/FE/Ext(SFD-Rajasthan)/2013-15.

2- राजस्थान के पवित्र उपवनों की जैव विविधता का प्रलेखन, बेहतर प्रबंधन एवं लोगों की आजीविका सुधार हेतु। AFRI-09/FE/Ext(SFD):Raj/2013-15.

3- राजस्थान में वानिकी के अनुप्रयोग हेतु महत्वपूर्ण अनुसंधान निष्कर्षों एवं प्रौद्योगिकियों का प्रलेखन। AFRI-8/FE/Ext(SFD)/Raj.

4- भारत में औषधीय पौधों की मांग एवं आपूर्ति का आकलन करने हेतु अध्ययन एवं सर्वेक्षण। (ICFRE समन्वित परियोजना)

5- वन सीमांत गांवों में वन भूमि की सीमा की पहचान। (AFRI/FED/NRAA/2011-16)

6- राजस्थान के वनों के लिए कार्बन भंडार एवं मृदा वर्गीकरण मानचित्रण।

7- राजस्थान में वानिकी के अनुप्रयोग हेतु महत्वपूर्ण अनुसंधान निष्कर्षों एवं प्रौद्योगिकियों का प्रलेखन। (AFRI-08/FED/SFD-Raj/2013-17)

8- राजस्थान के पवित्र उपवनों का प्रलेखन एवं उनमें से कुछ में जैव विविधता का आकलन, बेहतर प्रबंधन एवं लोगों की आजीविका हेतु। (AFRI/FE/SFD-Raj./2016-2017) (द्वितीय चरण)

9- उदयपुर स्थित IIM परिसर में क्षतिग्रस्त अरावली पहाड़ियों के भूदृश्य विकास एवं पुनर्स्थापन हेतु प्रजातियों का मूल्यांकन। (AFRI-13/FED/IIM, Udaipur/2014-17)

10- आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण मरुस्थलीय पौधे Salvadora persica के संवर्धन हेतु ऊतक संवर्धन तकनीक का विकास। (AFRI-92/FGTB/ICFRE/2009-2015)

11- जीन अभिव्यक्ति पैटर्न विश्लेषण के माध्यम से लवण सहनशीलता का अध्ययन। (AFRI-102/FGTD/ICFRE/2010-2015)

12- नीम में उच्च तेल एवं अजादिरैक्टिन की स्क्रीनिंग। (AFRI-34/FGTB/ICFRE/2002-2016)

13- आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण मरुस्थलीय पौधे Caparis deciduca के संवर्धन हेतु प्रौद्योगिकियों का विकास। AFRI-105/FGTB/ICFRE/2010-16.

14- Tecomella undulata (Sm.) Seem. की विविधता का आकलन, सुधार एवं क्लोनिंग तकनीकों का परिष्करण। (AFRI-04/FGTB/ICFRE/2012-17)

15- नीम, अडूसा एवं बांस के आनुवंशिक रूप से श्रेष्ठ वृक्षों के क्लोनल संवर्धन एवं आपूर्ति हेतु जैव-प्रौद्योगिकीय उपकरणों का उपयोग। (AFRI-06/FGTB/SFD-Guj./2013-17)

16- गर्म शुष्क क्षेत्रों में कम्पोस्टिंग एवं जैव-उर्वरक उत्पादन को बढ़ाने हेतु नवाचारी दृष्टिकोण। (AFRI-111/FPD/ICFRE/2011-2015)

17- स्वदेशी एवं विदेशी वन वृक्ष प्रजातियों के बीज कीटों पर अध्ययन तथा गुजरात में प्रमुख कीट क्षति हेतु IPM पैकेज का विकास। (AFRI-107/GCR/SFD-Guj./2011-15)

18- राजस्थान में सामाजिक-आर्थिक उत्थान हेतु खेजड़ी मृत्यु का समेकित प्रबंधन। (AFRI-99/FPD/ICFRE/2010-17)

19- शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में खाद्य एवं पोषण हेतु चयनित स्वदेशी कम-ज्ञात जंगली खाद्य पौधों की क्षमता का उपयोग। AFRI-110/NWFP/ICFRE/2011-16.

20- पश्चिमी भारतीय सागौन (Tectona grandis L.f) में आनुवंशिक विविधता एवं वंशागति पर अध्ययन। (AFRI-94/Silvi/ICFRE/2009-2015)

21- गुजरात राज्य में सागौन रोपण में उत्पादकता अध्ययन तथा वृद्धि एवं उपज का मॉडलिंग। AFRI-96/Silvi/JBIC/2009-2016

22- राजस्थान राज्य में क्षतिग्रस्त सामुदायिक भूमि की जैव विविधता पुनर्बहाली एवं लोगों की आजीविका के स्रोत के रूप में Prosopis juliflora का प्रभाव। AFRI-104/AFED/ICFRE/2010-2016

23- शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण पौध तैयार करने हेतु आधुनिक नर्सरी प्रथाओं का परिष्करण तथा चयनित महत्वपूर्ण वन वृक्ष प्रजातियाँ। AFRI-109/Silvi/ICFRE/2011-16

24- Melia composita के आनुवंशिक सुधार हेतु अखिल भारतीय समन्वित परियोजना। (AFRI/10/Silvi/ICFRE/AICP/2012-17)

25- शुष्क क्षेत्र के कुछ वृक्ष/झाड़ी/खरपतवार से व्यापक स्पेक्ट्रम एंटीफंगल यौगिक की पहचान एवं एंटीफंगल क्षमता का मूल्यांकन। (AFRI-93/AFE/ICFRE/2009-2015)

26- राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों में एग्रोफॉरेस्ट्री प्रणाली की उत्पादकता बढ़ाने हेतु संसाधनों का प्रबंधन। AFRI-1/AFED/ICFRE/AICF/2012-2016



हिमालयन फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (HFRI), शिमला

2015-2016

1- हिमाचल प्रदेश के शिमला वन मंडल के विभिन्न वन प्रकारों में कार्बन भंडार का आकलन।

2- हिमाचल प्रदेश में Pityogenes scitus Blanford (Coleoptera: Scolytidae) की जैविकी पर जलवायु के प्रभाव का अध्ययन।

3- Juniperus polycarpos C. Koch के बीजों पर कीट कीटकों की जैविकी एवं प्रबंधन तथा नर्सरी में कीट-प्रतिरोध क्षमता का मूल्यांकन।

4- भारतीय हिमालय के शीत मरुस्थलों (स्पीति एवं लेह) में पाए जाने वाले पतंगों (Lepidoptera) की वर्गिकी एवं आणविक विश्लेषण (RAPD-PCR के माध्यम से)।

5- Abies spectabilis (D. Don) Spach के बीजों के अंकुरण एवं दीर्घायु पर अध्ययन।

6- उच्च बीज तेल सामग्री हेतु जीन मार्करों का विकास तथा Jatropha curcas में मादा पुष्प विकास के आणविक आधार का विश्लेषण, उच्च बीज उत्पादन हेतु आनुवंशिक सुधार के लिए।

2016-2017

1- पुष्पीय विविधता की प्राथमिकता निर्धारण: शिमला जलग्रहण अभयारण्य, हिमाचल प्रदेश में महत्वपूर्ण प्रजातियों के संरक्षण हेतु रणनीतियों का विकास।

2- दीर्घकालिक पारिस्थितिक निगरानी हेतु हिमाचल प्रदेश के मंडी ज़िले स्थित शिकारी देवी वन्यजीव अभयारण्य में पादप विविधता अध्ययन।

3- हिमाचल प्रदेश में अष्टवर्ग समूह की औषधीय एवं सुगंधित पौधों (MAPs) का सर्वेक्षण एवं मानचित्रण।

4- हिमाचल हिमालय के मध्य-पहाड़ी परिस्थितियों में Diploknema butyracea (Roxb.) H. J. Lam तथा Myrica esculenta Buch.-Ham. के लिए नर्सरी एवं प्रारंभिक रोपण आवश्यकताओं का निर्धारण।

2017-2018

1- हिमाचल प्रदेश में उच्च ऊँचाई वाले संक्रमण क्षेत्र: वैश्विक तापन के प्रभावों के आकलन हेतु दीर्घकालिक अध्ययन।

वित्तपोषण एजेंसी: CAT योजना अंतर्गत HPSFD

2- हिमाचल प्रदेश के शिमला वन मंडल की चोपल वन प्रभाग में स्थानीय लोगों द्वारा उपयोग किए जाने वाले स्वदेशी औषधीय एवं सुगंधित पौधों पर नृवंशीय-वनस्पति अध्ययन।

वित्तपोषण एजेंसी: CAT योजना अंतर्गत HPSFD

3- Aconitum heterophyllum Wall. ex Royle, Podophyllum hexandrum Royle एवं Angelica glauca Edgew के गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री का उत्पादन तथा उनकी खेती तकनीक का स्थानीय समुदायों तक विस्तार।

वित्तपोषण एजेंसी: NMPB, नई दिल्ली

4- जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश के मॉडल ग्राम लानाबांका में वैज्ञानिक हस्तक्षेप को अपनाकर प्राकृतिक जल संसाधनों के पुनरुद्धार, पुनर्भरण, स्वच्छता एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का सृजन। PI: डॉ. राजेश शर्मा (सितंबर 2014 – अगस्त 2017)।



इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट प्रोडक्टिविटी, रांची

2015-16:

1- गंगेटिक मैदानों एवं छोटानागपुर पठार में बड़े पैमाने पर क्लोनल वानिकी के लिए Dalbergia sissoo Roxb. के क्लोनों की उपयुक्तता का मूल्यांकन। [PI - डॉ. संजय सिंह, वैज्ञानिक - F; परियोजना अवधि (PP) - 2011–2016; बजट - ₹ 29.40 लाख]

2- पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों (आयुर्वेद, यूनानी एवं चीनी) में व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली औषधीय वनस्पतियों Tribulus terrestris L. एवं Cissus quadrangularis L. की जैविक खेती हेतु कृषि-तकनीकों का विकास। [P.I - डॉ. मालबिका रे, वैज्ञानिक - D; परियोजना अवधि (PP) – 3 वर्ष (2013–2016); बजट परिव्यय - ₹ 10.18 लाख]

2016-17:

1- झारखंड के संवेदनशील समूहों की आजीविका में सुधार हेतु सामुदायिक भूमि पर वृक्ष-आधारित तिलहन (Tree Borne Oilseeds - TBOs)। [PI - डॉ. अनिमेष सिन्हा, वैज्ञानिक – E; परियोजना अवधि (PP): 2012–2017; बजट परिव्यय - ₹ 23.34 लाख]



इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट बायोडायवर्सिटी, हैदराबाद

2015-2016

आंतरिक परियोजनाएँ

1- जैव-विविधता संरक्षण हेतु श्रीहरिकोटा (SHAR) एवं पुलिकट झील पारिस्थितिकी तंत्रों में अनुक्रमिक प्रवृत्तियों एवं उत्पादकता का अध्ययन। डॉ. जी.आर.एस. रेड्डी (2013-2016)

2- आंध्र प्रदेश के कावल टाइगर रिज़र्व की पारिस्थितिक विविधता – एक बेंचमार्क अध्ययन। डॉ. जी.आर.एस. रेड्डी (2013-14)

3- आंध्र प्रदेश के अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में वृक्ष प्रजातियों के रूप में Wrightia tinctoria R.Br. एवं Gmelina arborea Roxb. पर आधारित कृषि-वानिकी मॉडल का विकास। एम. बी. होन्नुरी (2009-2014)

4- Pterocarpus santalinus L.f. की जनसंख्या आनुवंशिकी एवं फाइलोजियोग्राफी तथा जैव-प्रौद्योगिकीय हस्तक्षेपों के माध्यम से इसका एक्स-सीटू संरक्षण। डॉ. एस. पट्टनायक (2010-2013)

5- आंध्र प्रदेश में सागौन (Teak) के क्लोनल बीज बागानों में प्रजनन प्रतिरूपों का आणविक मूल्यांकन। डॉ. एस. पट्टनायक (2011-2014)

6- Dalbergia latifolia Roxb. एवं Pterocarpus santalinus L.f. के उत्कृष्ट जर्मप्लाज़्म उत्पादन हेतु सूक्ष्म-प्रसार (Micropropagation) प्रोटोकॉल का विकास। डॉ. जी.आर.एस. रेड्डी (2009-2014)

बाह्य परियोजनाएँ

1- एपी मेडिसिनल एंड एरोमैटिक बोर्ड की परियोजना के अंतर्गत मॉडल नर्सरी की स्थापना। चरण – III डॉ. जी.आर.एस. रेड्डी (2014-15)

2- एपी मेडिसिनल एंड एरोमैटिक बोर्ड की परियोजना के अंतर्गत मॉडल नर्सरी की स्थापना। चरण – IV डॉ. जी.आर.एस. रेड्डी (2015-16)



सेंटर फॉर सोशल फॉरेस्ट्री एवं ईको-रिहैबिलिटेशन (CSFER), इलाहाबाद

1- भारत के विभिन्न कृषि-पारिस्थितिक क्षेत्रों के लिए कृषि-वानिकी मॉडलों का विकास (1995-2000)। प्रधान अन्वेषक (PI): डॉ. एन. पंत। वित्तपोषक एजेंसी: NABARD

2- ICFRE को सुदृढ़ एवं विकसित करना (1995-2000)। PI: प्रमुख, FRCER वित्तपोषक एजेंसी: UNDP

3- बंजर भूमि एवं कृषि-वानिकी विकास (1995-2001)। PI: डॉ. एस. बी. सिंह वित्तपोषक एजेंसी: विश्व बैंक

4- विंध्याचल पहाड़ियों एवं गंगा के मैदानी क्षेत्रों में पर्यावरणीय पुनर्वास (1995-2001)। PI: डॉ. वी. के. वर्मा, डॉ. अनुभा श्रीवास्तव, डॉ. कुमुद दुबे वित्तपोषक एजेंसी: विश्व बैंक

5- पारिस्थितिकी तंत्रों की उत्पादकता (1995-2001)। PI: डॉ. नीरज पंत, डॉ. अमित पांडे वित्तपोषक एजेंसी: विश्व बैंक

6- रोपण सामग्री सुधार कार्यक्रम (1995-2001)। PI: श्री गंगा प्रसाद, श्री बी.एस. मिश्रा, IFS वित्तपोषक एजेंसी: विश्व बैंक

7- इलाहाबाद ज़िले की विंध्याचल श्रेणी में सूक्ष्मजीवी प्रौद्योगिकी के माध्यम से सिलिका खनन क्षेत्रों का पुनः हरितीकरण (2000-2005)। PI: डॉ. के. दुबे वित्तपोषक एजेंसी: ICFRE

8- पूर्वी उत्तर प्रदेश में जन-उन्मुख वानिकी कार्यक्रमों में सामाजिक-आर्थिक बाधाओं का अध्ययन (2003-2005)। PI: श्री वी.के. सिंह, IFS वित्तपोषक एजेंसी: ICFRE

9- वन-उत्पत्ति वाले वृक्ष-जनित तिलहन (TBOs) जैसे जेट्रोफा कर्कस, नीम एवं करंज पर अनुसंधान एवं विकास (2003-04)। PI: श्री वी.के. सिंह, IFS वित्तपोषक एजेंसी: NOVOD बोर्ड

10- पूर्वी उत्तर प्रदेश में Buchnania lanzan के कृत्रिम पुनर्जनन हेतु उपयुक्त तकनीक का विकास (2000-2005)। PI: श्री जी. प्रसाद वित्तपोषक एजेंसी: ICFRE

11- पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए कृषि-वानिकी मॉडलों का विकास (2007-2010)। PI: डॉ. के. दुबे वित्तपोषक एजेंसी: ICFRE

12- विभिन्न जैव-उपचारों का उपयोग कर चयनित Ficus प्रजातियों की नर्सरी तकनीकों का मानकीकरण (2007-2009)। PI: श्री ए.के. पांडे, IFS वित्तपोषक एजेंसी: ICFRE

13- उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के चयनित पौधों से व्यावसायिक रूप से उपयोगी रंग उत्पादों का विकास (2008-2011)। PI: डॉ. एच.ओ. सक्सेना, डॉ. अनुभा श्रीवास्तव वित्तपोषक एजेंसी: ICFRE

14- राष्ट्रीय नेटवर्क कार्यक्रम के अंतर्गत जेट्रोफा (Jatropha curcas) पर अनुसंधान एवं विकास (2004-2011)। PI: श्री वी.के. सिंह, IFS; डॉ. के. दुबे वित्तपोषक एजेंसी: NOVOD बोर्ड

15- पूर्वी उत्तर प्रदेश के चयनित ज़िलों में व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण औषधीय पौधों की विपणन व्यवस्था का अध्ययन (2010-2013)। PI: डॉ. बी.के. पांडे वित्तपोषक एजेंसी: ICFRE

16- विस्तार एवं वनीकरण कार्यक्रमों हेतु उत्तर प्रदेश के चयनित ज़िलों की महत्वपूर्ण वृक्ष प्रजातियों की मांग-आपूर्ति अंतराल का विश्लेषण (2007-2010)। PI: डॉ. अनुभा श्रीवास्तव वित्तपोषक एजेंसी: ICFRE

17- उत्तर प्रदेश में महुआ (Madhuca longifolia var. latifolia) की पुष्प, बीज एवं तेल उपज का मात्रात्मक एवं गुणात्मक सुधार (2009-2012)। PI: डॉ. बी.के. पांडे वित्तपोषक एजेंसी: ICFRE

18- एल्यूमिनियम उद्योग से उत्पन्न बॉक्साइट अवशेष (रेड मड) का नीली-हरित शैवाल/जैव-इनोकुलेंट द्वारा जैव-उपचार (2009-2012)। PI: डॉ. कुमुद दुबे वित्तपोषक एजेंसी: ICFRE

19- पूर्वी उत्तर प्रदेश के चयनित ज़िलों में औषधीय पौधों की विपणन प्रणाली का अध्ययन (2010-2013)। PI: डॉ. बी.के. पांडे वित्तपोषक एजेंसी: ICFRE

20- जैव-ड्रेनेज एवं मृदा संशोधन द्वारा जलभराव वाली बंजर भूमि का फाइटो-रीमेडिएशन (2010-2015)। PI: डॉ. कुमुद दुबे वित्तपोषक एजेंसी: ICFRE

21- पूर्वी उत्तर प्रदेश की मौजूदा बागानों हेतु औषधीय पौधों पर आधारित स्थल-विशिष्ट कृषि-वानिकी मॉडलों का विकास एवं प्रदर्शन मॉडल की स्थापना (2010-2013)। PI: डॉ. बी.के. पांडे वित्तपोषक एजेंसी: ICFRE

22- पूर्वी उत्तर प्रदेश में महत्वपूर्ण कृषि-वानिकी प्रजातियों के लकड़ी बाज़ारों का अध्ययन (2010-2013)। PI: डॉ. अनुभा श्रीवास्तव वित्तपोषक एजेंसी: ICFRE

23- मेजा थर्मल पावर प्लांट क्षेत्र में वनस्पति एवं जीव-जंतुओं का प्राथमिक सर्वेक्षण (2011)। PI: डॉ. अनीता तोमर वित्तपोषक एजेंसी: NTPC लिमिटेड

24- Stereospermum suaveolens की नर्सरी तकनीकें (2011-2013)। PI: डॉ. अनीता तोमर वित्तपोषक एजेंसी: ICFRE

25- वन सीमांत गांवों में वन भूमि की सीमा की पहचान (FRI, देहरादून की आंशिक परियोजना) (2011-2014)। PI: प्रमुख, FRC-ER वित्तपोषक एजेंसी: NRAA

26- आर्थिक रूप से मूल्यवान अल्प-प्रचलित फलदार वृक्ष प्रजातियों का संरक्षण एवं संवर्धन तथा फलों में संभावित रासायनिक घटकों का निर्धारण (2011-2014)। PI: डॉ. अनीता तोमर वित्तपोषक एजेंसी: ICFRE

27- सूक्ष्मजीवी प्रौद्योगिकी द्वारा विंध्य क्षेत्र की बलुआ पत्थर खनन भूमि का पुनर्स्थापन (2012-2017)। PI: डॉ. कुमुद दुबे वित्तपोषक एजेंसी: ICFRE

28- भारत के वन प्रकारों का पुनर्मूल्यांकन (FRI, देहरादून की आंशिक परियोजना) (2012)। PI: प्रमुख, FRC-ER वित्तपोषक एजेंसी: ICFRE

29- विंध्य क्षेत्र (उ.प्र.) में खनन एवं खनन नीतियों का स्थानीय लोगों की आजीविका पर सामाजिक-आर्थिक प्रभाव अध्ययन (2014-15)। PI: डॉ. कुमुद दुबे वित्तपोषक एजेंसी: नीति आयोग

30- पूर्वी उत्तर प्रदेश के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों हेतु Melia dubia आधारित कृषि-वानिकी प्रणाली का विकास (2014-2017)। PI: डॉ. कुमुद दुबे वित्तपोषक एजेंसी: कृषि अनुसंधान परिषद, लखनऊ (UPCAR)

31- एल्यूमिना उद्योग से उत्पन्न बॉक्साइट अवशेष (रेड मड) का एकीकृत जैव-ठोस सूक्ष्मजीव संयोजनों द्वारा जैव-उपचार (2015-2020)। PI: डॉ. कुमुद दुबे वित्तपोषक एजेंसी: MoEF&CC

32- पूर्वी उत्तर प्रदेश में कृषि-वानिकी को बढ़ावा देने हेतु यूकेलिप्टस के उपयुक्त क्लोनों का आकलन (2016-2021)। PI: डॉ. अनुभा श्रीवास्तव वित्तपोषक एजेंसी: ICFRE

33- पूर्वी उत्तर प्रदेश में पॉपलर आधारित कृषि-वानिकी (2017-2020)। PI: डॉ. अनीता तोमर वित्तपोषक एजेंसी: UP-CST

34- पूर्वी मैदानी क्षेत्र (उ.प्र.) में विकास एवं सततता हेतु कृषि-वानिकी प्रौद्योगिकी का परिचय (2018-2021)। PI: डॉ. अनुभा श्रीवास्तव वित्तपोषक एजेंसी: UP-CST

35- कॉपिस्ड सामग्री की लकड़ी गुणों के आकलन हेतु उच्च घनत्व रोपण प्रबंधन (FRI, देहरादून की आंशिक परियोजना) (2018-2021)। PI: डॉ. अनीता तोमर वित्तपोषक एजेंसी: ICFRE

36- पौधा-सूक्ष्मजीव-मृदा अंतःक्रिया पर आधारित जैव-पुनर्स्थापन तकनीक द्वारा क्षतिग्रस्त भूमि का पुनर्स्थापन (MNNIT के साथ सह-PI सहयोग) (2013-2014)। PI: डॉ. कुमुद दुबे वित्तपोषक एजेंसी: DBT

37- उत्तर प्रदेश राज्य में राष्ट्रीय वनीकरण कार्यक्रम (NAP) का FDA मध्यावधि मूल्यांकन (2006-07)। PI: श्री ए.के. पांडे, IFS वित्तपोषक एजेंसी: MoEF&CC

38- CASHPOR-SIDBI से संबद्ध प्रशिक्षण कार्यक्रम (2019-20)। PI: श्री आलोक यादव वित्तपोषक एजेंसी: CASHPOR माइक्रो-फाइनेंस, वाराणसी

39- DST महिला वैज्ञानिक योजना के अंतर्गत बांस एवं अन्य सहवर्ती झाड़ियों व जड़ी-बूटियों में कार्बन संधारण की दर का अध्ययन (2009-2011)। PI: डॉ. कुमुद दुबे वित्तपोषक एजेंसी: DST



वन आधारित आजीविका एवं विस्तार केंद्र (CFLE), अगरतला

2015-2016

1- त्रिपुरा में वर्ष 2009-2010 से 2014-15 तक CAMPA गतिविधियों की निगरानी एवं मूल्यांकन, त्रिपुरा CAMPA, त्रिपुरा सरकार द्वारा वित्तपोषित।

2- त्रिपुरा वन विभाग, त्रिपुरा सरकार के अंतर्गत CAMPA गतिविधियों का मूल्यांकन पूर्ण किया गया तथा वित्तीय वर्ष 2016-17 के दौरान मूल्यांकन रिपोर्ट नोडल अधिकारी, त्रिपुरा CAMPA को प्रस्तुत की गई।

3- वन सीमांत गांवों में वन भूमि की सीमा की पहचान – NRAA परियोजना (त्रिपुरा)

4- त्रिपुरा में Melocanna baccifera की पुष्पोत्तर पुनर्जनन स्थिति का अध्ययन (RFRI के अंतर्गत)

5- बांस नर्सरी एवं बांस रोपण पर जागरूकता बैठक:



वन आनुवंशिकी एवं वृक्ष प्रजनन संस्थान, कोयंबटूर

2015-2016

1- यूकेलिप्टस में लवण सहनशीलता से संबंधित जीनों के कार्यात्मक विश्लेषण हेतु विधियों का विकास

2- पोंगामिया पिन्नाटा के उच्च उपज देने वाले क्लोनों का चयन एवं मूल्यांकन

3- चयनित देशी वृक्ष प्रजातियों का साइटोजेनेटिक (सूत्रकीय आनुवंशिक) विश्लेषण

4- गॉल ततैया Leptocybe invasa पर प्राकृतिक शत्रुओं की उपस्थिति पर यूकेलिप्टस प्रजातियों का प्रभाव

5- एडवेंटीशियस रूटिंग एवं लकड़ी के गुणों के लक्षणों हेतु यूकेलिप्टस की मैपिंग जनसंख्या का बहु-पर्यावरण उच्च-थ्रूपुट फीनोटाइपिंग

6- यूकेलिप्टस टेरेटिकॉर्निस में पल्पिंग गुणों के मार्करों की पहचान हेतु कैंडिडेट जीन एसोसिएशन


2016-2017

1- Population structure, regeneration status and pollination ecology of Dalbergia latifolia and D. sissoides

2- Assessment of soil organic carbon under different land uses in Tamil Nadu

3- Mapping and monitoring of Casuarinas and Eucalyptus Plantations in Tamilnadu using RS and GIS

4- Selection of clones of Acacia auriculiformis with desirable stem form and wood properties for short rotation timber production


बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाएँ

2015-2016

1- पश्चिमी घाट के पालक्काड गैप स्थित वालयार घाटी में परिदृश्य परिवर्तनों के संदर्भ में तितली विविधता

2- यूकेलिप्टस में आकस्मिक जड़ विकास एवं लकड़ी के गुणों से जुड़े QTLs की पहचान हेतु मैपिंग जनसंख्या का विकास

3- नियंत्रित परागण के माध्यम से Corymbia torelliana × C. citriodora का अंतःप्रजातीय संकर विकास: कागज एवं पल्प उद्योग हेतु एक आनुवंशिक संसाधन

4- तमिलनाडु में औद्योगिक वानिकी को समर्थन देने हेतु उन्नत बायोमास एवं पल्प उत्पादन क्षमता वाले नियंत्रित परागित यूकेलिप्टस संकरों का उत्पादन एवं परीक्षण

5- तमिलनाडु में यूकेलिप्टस रोपणों पर Leptocybe invasa (Fisher एवं LaSalle) की स्थापना में सहायक कारक

6- प्रिकली एकेशिया के लिए नए जैव-नियंत्रण अवसर: भारत में अन्वेषण


2015-2016

1- Yield improvement and adoption of plantation technologies in bioenergy crops for increasing the potential of bioenergy production

2- New Biocontrol Opportunities for Prickly Acacia Exploration in India

3- Reclamation of laterite lands using beneficial microbe in Kasargode District.

4- Development of small Bamboo nursery

5- Study on Comparison of Natural and Plantation grown Red sanders Wood

6- Effect of elevated CO2 on active principles of commercially important medicinal plants

7- Feasibility study on Facilitation of Tree Nursery for Enhancing the Livelihood of Tribal Community in Tamil Nadu



रेन फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, जोरहाट

2015-2016

1- असम के उष्णकटिबंधीय अर्ध-सदाबहार वन नामबोर अनुसंधान वन में मृदा बीज बैंक की विविधता एवं गतिकी पर अध्ययन फंडिंग एजेंसी: डीएसटी

2- उत्तर-पूर्व भारत की विभिन्न भूमि उपयोग प्रणालियों में मृदा-जनित कीट-रोगजनक कवकों की विविधता पर अध्ययन तथा Gmelina arborea Roxb. एवं Aquilaria malaccensis Lamk. के प्रमुख पर्णभक्षी कीटों के प्रबंधन में उनकी उपयोगिता फंडिंग एजेंसी: ICFRE

3- असम में नेपाली समुदाय द्वारा उपयोग किए जाने वाले औषधीय पौधों से संबंधित पारंपरिक ज्ञान का अध्ययन एवं रासायनिक विश्लेषण हेतु महत्वपूर्ण प्रजातियों की पहचान फंडिंग एजेंसी: ICFRE

4- असम के अर्ध-सदाबहार वनों में भू-स्थलीय (Above Ground) काष्ठीय जैव-भार की विविधता एवं कार्बन अवशोषण क्षमता का आकलन फंडिंग एजेंसी: ICFRE

5- उत्तर-पूर्व भारत के विभिन्न वन पारितंत्रों में पाए जाने वाले Trichoderma स्ट्रेन्स पर अध्ययन फंडिंग एजेंसी: ICFRE

6- Lilium mackliniae Sealy में अल्पपोषण (बौनापन/विकास अवरोध) पर प्रारंभिक जांच फंडिंग एजेंसी: ICFRE

2016-2017

7- नागालैंड राज्य के चयनित स्थलों में वनों एवं झूम भूमि क्षेत्रों के अंतर्गत मृदा प्रोफ़ाइल गुणों पर अध्ययन फंडिंग एजेंसी: ICFRE

8- Vanda coerulea का इन-विट्रो प्रवर्धन फंडिंग एजेंसी: ICFRE

9- चयनित केन (बेंत) प्रजातियों की रोपण सामग्री का उत्पादन एवं असम व मिज़ोरम के सीमावर्ती गाँवों में वृक्षारोपण ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने हेतु फंडिंग एजेंसी: ICFRE

10- असम के औषधीय एवं सुगंधित पौधों में आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण रोगों पर अध्ययन तथा जैविक पद्धति द्वारा प्रबंधन तकनीकों का विकास फंडिंग एजेंसी: ICFRE

11- Michelia champaca में बीज स्रोत विविधता, अंकुरण एवं पौध वृद्धि पर अध्ययन तथा पौध बीज उद्यान की स्थापना फंडिंग एजेंसी: ICFRE

12- पौध प्रजातियों से अगरबत्ती निर्माण हेतु चिपकाने वाले पदार्थों की खोज फंडिंग एजेंसी: ICFRE

13- वन फलों के पोषण मूल्य का मूल्यांकन एवं स्थानीय लोगों की आर्थिक उन्नति हेतु मूल्य संवर्धित उत्पादों का विकास फंडिंग एजेंसी: ICFRE

14- मेघालय के जंगली मशरूमों के पारिस्थितिक एवं नृजातीय-मायकोलॉजिकल पहलुओं पर अध्ययन फंडिंग एजेंसी: ICFRE

15- ऊपरी असम के Bherjan-Borjan-Padumoni R.F., Dilli R.F. एवं Abhayapur R.F. में Mikania micrantha Kunth. ex H.B.K. का देशी प्रजातियों के सूक्ष्म-पर्यावरण पर प्रभाव फंडिंग एजेंसी: ICFRE

16- उत्तर-पूर्व भारत के मिज़ोरम एवं त्रिपुरा में Calamus प्रजातियों की जनसंख्या आनुवंशिक संरचना एवं संक्रामक रोगों का प्रभाव फंडिंग एजेंसी: ICFRE

17- ऊपरी असम में बाँस-आश्रित (Bambusicolous) मैक्रो-फंगी की विविधता एवं पारिस्थितिक स्थिति पर मायकोलॉजिकल अध्ययन फंडिंग एजेंसी: ICFRE

18- मेघालय की महत्वपूर्ण वृक्ष प्रजातियों के लिए बायोमास समीकरण की स्थापना फंडिंग एजेंसी: वन एवं पर्यावरण विभाग, मेघालय



इंस्टीट्यूट ऑफ वुड साइंस एंड टेक्नोलॉजी, बेंगलुरु

2015-2016

ICFRE द्वारा वित्तपोषित परियोजनाएँ

1- दक्षिण भारत से विभिन्न आयु वर्ग की Melia dubia की लकड़ी के गुणों का मूल्यांकन, विभिन्न अंतिम उत्पादों के लिए उपयुक्तता का निर्धारण एवं मूल्य संवर्धित उत्पादों का विकास (AICP- 2012-2016)। PI: डॉ. एस. के. शर्मा

2- नैनोसेलूलोज से भरे स्टार्च आधारित कंपोज़िट्स (2013-2016) PI: डॉ. एस. एस. चौहान

3- यूकेलिप्टस हाइब्रिड तेल का रासायनिक संशोधन एवं सुगंधित उत्पादों का विकास (2013-2016) PI: श्री एस. एच. जैन

4- चंदन स्केल एवं मिलीबग के प्रबंधन हेतु कोक्सिनेलिड्स आधारित जैव-नियंत्रण कार्यक्रमों का विकास (2011-2016) PI: डॉ. आर. सुंदरराज

5- प्रायद्वीपीय भारत के अर्ध-शुष्क एवं आर्द्र उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में औद्योगिक रूप से महत्वपूर्ण सात बाँस प्रजातियों का जैव-भार, शुद्ध प्राथमिक उत्पादकता एवं शूट उत्पादकता (2013-2016) PI: डॉ. श्याम विश्वनाथ

6- Melia dubia रोपणों में वृद्धि परिवर्तनशीलता एवं बीज अंकुरण अध्ययन (2011-2016) PI: डॉ. ए. एन. अरुण कुमार

बाह्य रूप से सहायता प्राप्त परियोजनाएँ

1- कर्नाटक के पश्चिमी घाट में Dendrocalamus stocksii (Munro) का वितरण, विविधता एवं उत्पादकता (2013-2015) PI: डॉ. श्याम विश्वनाथ; वित्तपोषक एजेंसी: KFD

2- पश्चिमी घाट के आर्द्र सदाबहार वनों की Mesua ferrea एवं Madhuca insignis प्रजातियों में बीज व्यवहार तथा भिन्न सुखाने एवं तापमान का व्यवहार्यता पर प्रभाव (2013-2015) PI: डॉ. गीता जोशी; वित्तपोषक एजेंसी: KFD

3- कर्नाटक में Melia dubia Cav. की वृद्धि का आकलन एवं आनुवंशिक विविधता (2013-2015) PI: डॉ. ए. एन. अरुण कुमार; वित्तपोषक एजेंसी: KFD

4- वनों में लकड़ी के क्षय का आकलन एवं जलवायु परिवर्तन में योगदान देने वाले मीथेन उत्सर्जन पर उसका प्रभाव (2013-2015) PI: डॉ. ए. मुथुकुमार; वित्तपोषक एजेंसी: KFD

5- आयामी स्थिरता एवं टिकाऊपन में सुधार हेतु लकड़ी के रासायनिक संशोधन की नई विधियाँ (2013-2016) PI: डॉ. के. के. पांडेय; वित्तपोषक एजेंसी: CSIR

6- Ailanthus malabarica DC से Halmaddi रेज़िन के निष्कर्षण की विधियों का मानकीकरण, मूल्यांकन एवं मात्रात्मक विश्लेषण (2013-2015) PI: बी. एस. चंद्रशेखर; वित्तपोषक एजेंसी: KFD

7- भारत के पूर्वी तट के पाँच प्रमुख बंदरगाहों में कठोर अधिष्ठान (Hard substratum) जीव-जंतुओं पर अध्ययन (2012-2016) PI: डॉ. एम. बालाजी; वित्तपोषक एजेंसी: NIO

 

2016-2017

ICFRE द्वारा वित्तपोषित परियोजनाएँ

1- Melia composita की लकड़ी का संशोधन, इसकी आयामी स्थिरता एवं टिकाऊपन में सुधार हेतु। (AICP- 2012-2017) PI: डॉ. के. के. पांडेय

2- लकड़ी का द्रवीकरण (Liquefaction) एवं द्रवीकृत लकड़ी से मूल्य संवर्धित उत्पादों का विकास (2013-2017) PI: डॉ. एस. एस. चौहान

3- प्लाइवुड एवं पैनलवुड उद्योगों के लिए चयनित उष्णकटिबंधीय काष्ठ प्रजातियों का शाकीय प्रवर्धन एवं साइल्वीकल्चर (वन संवर्धन) पद्धतियाँ (2011-2017) PI: डॉ. गीता जोशी

4- दो बाँस प्रजातियों Bambusa balcooa एवं Thyrsostachys oliveri के इन विट्रो प्रवर्धन तथा माइक्रोप्रोपेगेटेड पौधों की आनुवंशिक शुद्धता (Genetic fidelity) अध्ययन हेतु प्रोटोकॉल का परिष्करण एवं मानकीकरण (2011-2017) PI: डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव

बाह्य रूप से सहायता प्राप्त परियोजनाएँ

1- रोपण वनों की लकड़ी में मूल्य संवर्धन हेतु लकड़ी का तापीय संशोधन (Thermal modification)। PI: डॉ. एस. आर. शुक्ला (जून 2013 से दिसंबर 2016) वित्तपोषक एजेंसी: पंजाब वन विभाग

2- पंजाब में प्रचलित रूप से उगाई जाने वाली वृक्ष प्रजातियों की लकड़ी की गुणवत्ता में परिवर्तनशीलता का आकलन। PI: डॉ. एस. एस. चौहान (2013–जून 2016) वित्तपोषक एजेंसी: पंजाब वन विभाग

3- पंजाब राज्य में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों से प्राकृतिक रेशा (Natural Fiber) भरे थर्मोप्लास्टिक कंपोज़िट्स का विकास। PI: डॉ. पंकज अग्रवाल (2013–जून 2016) वित्तपोषक एजेंसी: पंजाब वन विभाग

4- चंदन (Santalum album) एवं बाँस के गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री के उत्पादन हेतु प्रदर्शन प्लॉट्स एवं आधुनिक नर्सरी की स्थापना – पंजाब के उप-घटक (Sub-component I) के अंतर्गत। PI: डॉ. श्याम विश्वनाथ (2013–जून 2016) वित्तपोषक एजेंसी: पंजाब वन विभाग

5- माइक्रोवेव सहायक लकड़ी का रासायनिक संशोधन। PI: डॉ. के. के. पांडेय (2013–सितंबर 2016) वित्तपोषक एजेंसी: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, नई दिल्ली

6- जैव-थर्मोप्लास्टिक कंपोज़िट्स: भौतिक, यांत्रिक, आकारिकी (Morphological) एवं तापीय गुणों का मूल्यांकन। PI: डॉ. पंकज अग्रवाल (2013–दिसंबर 2016) वित्तपोषक एजेंसी: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, नई दिल्ली

7- दक्षिण भारत के विभिन्न पारिस्थितिक-जलवायु वन आवासों की मिट्टी में कीट-रोगजनक फफूंद Metarhizium की उपस्थिति एवं विविधता। PI: डॉ. आर. सुंदरराज (2013-2016) वित्तपोषक एजेंसी: जैव प्रौद्योगिकी विभाग

8- कर्नाटक की एक महत्वपूर्ण औषधीय वनस्पति Santalum album L. का वितरण, आकलन एवं वृद्धि अध्ययन। PI: डॉ. बी. एन. दिवाकर (2014–अक्टूबर 2016) वित्तपोषक एजेंसी: राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड, नई दिल्ली

9- लकड़ी–पॉलिमर कंपोज़िट्स हेतु तीव्र वृद्धि वाली प्रजातियों की उपयुक्तता। PI: डॉ. एस. एस. चौहान (2016–फरवरी 2017) वित्तपोषक एजेंसी: तमिलनाडु वन विभाग



वानिकी अनुसंधान एवं मानव संसाधन विकास केंद्र, छिंदवाड़ा

2015-2017

1- Buchnania lanzan Spreng. के पौध (seedling) एवं क्लोनल रोपण सामग्री के क्षेत्रीय प्रदर्शन का तुलनात्मक अध्ययन।



बाँस एवं बेंत के लिए उन्नत अनुसंधान केंद्र, बेथलेहम वेंग्थलांग, आइज़ोल, मिज़ोरम

2017-2018

एआरसीबीआर द्वारा निम्नलिखित अनुसंधान परियोजनाएँ पूर्ण की गईं:

1- “वन सीमावर्ती ग्रामों में वन भूमि की पहचान” शीर्षक परियोजना के अंतर्गत मिज़ोरम के सभी आठ ज़िलों में सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण, जिसे राष्ट्रीय वर्षा आधारित क्षेत्र प्राधिकरण (NRAA) द्वारा वित्तपोषित किया गया (2012-17)।

2- चयनित बेंत (केन) प्रजातियों की रोपण सामग्री का उत्पादन तथा असम और मिज़ोरम के सीमावर्ती ग्रामों में वृक्षारोपण की स्थापना, ताकि ग्रामीण आजीविका को बनाए रखा जा सके (2013-17)।

3- उत्तर-पूर्व भारत के मिज़ोरम और त्रिपुरा में Calamus प्रजातियों की जनसंख्या आनुवंशिक संरचना तथा संक्रामक रोगों के प्रभाव का अध्ययन (2014-17)।

अंतिम बार समीक्षा और अद्यतन की तिथि: 10 Feb 2026

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