परिचय:
वन पारिस्थितिकी पुनर्वास हेतु वन अनुसंधान केंद्र (Forest Research Centre for Eco-Rehabilitation – FRC-ER), इलाहाबाद की स्थापना अक्टूबर 1992 में भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE), देहरादून के अंतर्गत एक उन्नत केंद्र के रूप में की गई थी। वर्तमान में यह देहरादून स्थित वन अनुसंधान संस्थान (FRI) का एक केंद्र है। इस केंद्र का उद्देश्य उत्तर प्रदेश राज्य में सामाजिक वानिकी एवं पारिस्थितिकी पुनर्वास के क्षेत्र में व्यावसायिक उत्कृष्टता को पोषित एवं विकसित करना है।
दायित्व (Mandate):
1- क्षतिग्रस्त पारिस्थितिकी तंत्रों तथा कठिन/तनावग्रस्त स्थलों के पुनर्वास एवं कृषि-वानिकी (एग्रो-फॉरेस्ट्री) के संवर्धन पर केंद्रित अनुसंधान करना।
2- वन संसाधनों के संरक्षण एवं सतत उपयोग हेतु उपलब्ध प्रौद्योगिकियों/प्रक्रियाओं/उपकरणों का उपयोगकर्ता समूहों तक प्रसार करना।
3- अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत अनुसंधान, शिक्षा एवं विस्तार गतिविधियों में प्रमुख संस्थान को सहयोग प्रदान करना।
मुख्य अनुसंधान क्षेत्र:
यह केंद्र पूर्वी उत्तर प्रदेश में सामाजिक वानिकी एवं पारिस्थितिकी पुनर्वास के क्षेत्र में व्यावसायिक उत्कृष्टता को पोषित एवं विकसित करने का लक्ष्य रखता है।
प्राथमिक (थ्रस्ट) क्षेत्र:
1- तनावग्रस्त स्थलों के वनीकरण हेतु उपयुक्त तकनीकी पैकेजों का विकास।
2- उत्पादकता में वृद्धि एवं स्थायित्व सुनिश्चित करने हेतु स्थल-विशिष्ट सामाजिक, कृषि एवं कृषि-वानिकी मॉडलों का विकास एवं प्रदर्शन।
3- स्वदेशी वृक्ष एवं औषधीय पादप प्रजातियों के बीज, नर्सरी एवं रोपण तकनीकों का मानकीकरण।
4- प्राथमिकता वाली वृक्ष प्रजातियों के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने हेतु बीज स्टैंड/बीज उत्पादन क्षेत्रों की पहचान, चयन, सीमांकन एवं प्रबंधन।
5- व्यावसायिक एवं क्षेत्रीय महत्व की प्रजातियों हेतु वृद्धि एवं उपज (Growth & Yield) मॉडलों का विकास।
6- विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में कृषि-वानिकी के लिए संभावनाशील वृक्ष प्रजातियों के उपयुक्त प्रजाति/क्लोन/प्रोवेनेंस का आकलन।
7- पूर्वी उत्तर प्रदेश के कृषि-जलवायु क्षेत्रों में लवण-प्रभावित भूमि के पुनर्वास हेतु स्वदेशी वृक्ष प्रजातियों का मूल्यांकन।
8- अनुसंधान परिणामों को उपयोगकर्ता-अनुकूल रूप में अंतिम उपयोगकर्ताओं जैसे एनजीओ, किसान, वन अधिकारी, शिक्षाविद आदि तक पहुँचाने हेतु अनुसंधान-विस्तार संबंधों का विकास एवं सुदृढ़ीकरण।
9- क्षेत्र की दुर्लभ, संकटग्रस्त एवं विलुप्तप्राय प्रजातियों का संसाधन सर्वेक्षण एवं संरक्षण।
10- आजीविका सृजन एवं समुदायों को लाभ पहुँचाने हेतु अनुसंधान निष्कर्षों की पहुँच का विस्तार।
प्रमुख उपलब्धियां: (विवरण देखने के लिए लिंक पर क्लिक करें)
1- अनुसंधान
संस्थान द्वारा वानिकी क्षेत्र के विभिन्न पहलुओं पर उल्लेखनीय अनुसंधान एवं विकास (R&D) योगदान दिया गया है, जिनका संक्षिप्त विवरण निम्नानुसार है:
1- गोरखपुर वन प्रभाग के कैम्पियरगंज में Dalbergia sissoo के SPA एवं SSPA तथा गोंडा एवं मथुरा वन प्रभागों में Acacia nilotica के SSPA एवं D. sissoo के CSO की स्थापना।
2- जलभराव एवं सोडिक स्थलों के पुनर्वास हेतु Terminalia arjuna, Acacia nilotica, Eucalyptus camaldulensis, Prosopis juliflora एवं Dalbergia sissoo के लिए मृदा संशोधन सहित टीला रोपण तकनीक का विकास।
3- पूर्वी उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जनपद में आम, आँवला, महुआ एवं बांस के बागानों के अंतर्गत खाली भूमि के उपयोग हेतु औषधीय पादप-आधारित कृषि-वानिकी मॉडलों का विकास, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त हो सके।
4- विंध्य क्षेत्र में सूक्ष्मजीवी प्रौद्योगिकी के माध्यम से पत्थर खनन क्षेत्रों का पुनर्स्थापन।
5- Pongamia pinnata, Albizia lebbeck, Azadirachta indica, Madhuca longifolia एवं Pithecellobium dulce के साथ सिलिका खनन स्थलों के पुनर्वास हेतु तकनीकी पैकेजों का विकास।
6- जैव-ड्रेनेज एवं मृदा संशोधन के माध्यम से जलभराव वाली बंजर भूमि का फाइटोरिमेडिएशन।
7- प्रतापगढ़, प्रयागराज एवं गोरखपुर जिलों में स्वदेशी वृक्ष प्रजातियों द्वारा लवण-प्रभावित भूमि का पुनर्वास।
8- रेड मड (बॉक्साइट अवशेष) के जैव-उपचार हेतु संभावनाशील सायनोबैक्टीरियल प्रजातियों की पहचान।
9- पूर्वी उत्तर प्रदेश में लकड़ी उत्पादों के कुशल विपणन हेतु वृक्ष उत्पादकों एवं व्यापारियों के बीच संपर्कों का संवर्धन।
10- एनटीपीसी की मेजा तापीय विद्युत परियोजना के आसपास पुष्प एवं जीव विविधता का प्रलेखन, ताकि संकटग्रस्त एवं महत्वपूर्ण प्रजातियों/समुदायों की पहचान की जा सके।
11- शंकरगढ़, इलाहाबाद के क्षतिग्रस्त वनों में Butea monosperma की उत्पादकता आकलन हेतु कार्यप्रणाली का विकास।
12- बिना किसी पॉटिंग मीडिया के Spondias pinnata के त्वरित एवं किफायती अंकुरण हेतु एक नवीन तकनीक का विकास।
13- बीज पूर्व-उपचार द्वारा Buchnania lanzan की नर्सरी तकनीकों का मानकीकरण।
14- पूर्वी उत्तर प्रदेश की एक दुर्लभ एवं उपेक्षित प्रजाति Stereospermum suaveolens हेतु बीज अंकुरण प्रोटोकॉल एवं बीज स्रोत स्क्रीनिंग का मानकीकरण।
15- गोरखपुर, महाराजगंज, बस्ती एवं देवरिया जिलों में उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण वृक्ष प्रजातियों की मांग-आपूर्ति अंतराल का विश्लेषण।
16- पूर्वी उत्तर प्रदेश में कृषि-वानिकी के विकास हेतु प्रयागराज, सोनभद्र, रायबरेली, बाराबंकी, गोरखपुर एवं बहराइच जिलों में लकड़ी एवं ईंधन लकड़ी जैसे महत्वपूर्ण वृक्ष उत्पादों के विपणन चैनलों को सुव्यवस्थित करने हेतु टिम्बर मार्केट सूचना प्रणाली का डेटाबेस तैयार करना।
17- सभी ऋतुओं में कटिंग के रूटिंग हेतु एक पोर्टेबल, कम लागत वाली, मिनी नॉन-मिस्ट प्रवर्धन कक्ष का डिजाइन, जो महंगे मिस्ट सेट-अप का विकल्प हो सकता है।
18- Curcuma longa, Beta vulgaris, Bixa orellana एवं Lawsonia inermis का उपयोग कर हर्बल गुलाल की तैयारी।
19- Ficus religiosa, F. benghalensis, F. glomerata एवं F. lacor की नर्सरी तकनीकों का विकास।
20- पूर्वी उत्तर प्रदेश हेतु यूकेलिप्टस एवं पॉपलर के उपयुक्त क्लोनों का आकलन।
21- उत्तर प्रदेश में गंगा एवं यमुना नदियों के पुनर्जीवन हेतु DPR की तैयारी।
22- पूर्वी उत्तर प्रदेश की चयनित वानिकी प्रजातियों के लिए ऊँचे पौध रोपण तकनीक का मानकीकरण।
23- गोरखपुर में साल (Sal) वृक्षों की बड़े पैमाने पर मृत्यु पर अनुसंधान।
पता-
प्रमुख
वन पारिस्थितिकी पुनर्वास हेतु वन अनुसंधान केंद्र, इलाहाबाद
3/1, लाजपत राय रोड, न्यू कटरा, इलाहाबाद-211002
फोन- 0532-2440796
ईमेल- dir_csfer@icfre.org