ग्रीन क्रेडिट सेल
ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम
“मुझे लगता है कि अब ग्रीन क्रेडिट पर गंभीरता से चर्चा करने का समय आ गया है। भारत इस दिशा में सक्रिय कदम उठा रहा है और एक मजबूत ग्रीन क्रेडिट ढांचा तैयार कर रहा है, जिसके माध्यम से हम जलवायु के अनुकूल कार्रवाई शुरू कर सकते हैं।आइए मिलकर देखें कि हम कैसे कार्यक्रम का उपयोग करके हम अपने व्यवसायों को कैसे बढ़ावा दे सकते हैं और साथ ही पर्यावरण की रक्षा भी कर सकते हैं”.
-भारत के माननीय प्रधान मंत्री, G20 शिखर सम्मेलन 2023
इस प्रयास में, भारत सरकार द्वारा 12 अक्टूबर 2023 को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत ग्रीन क्रेडिट नियम 2023 अधिसूचित किए गए, जो देशभर में स्वैच्छिक वृक्षारोपण गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए एक तंत्र के रूप में कार्य करेंगे, इस पहल के तहत, वृक्षारोपण करने वाले व्यक्तियों या संगठनों को ग्रीन क्रेडिट दिए जाएंगे। इस कार्यक्रम के माध्यम से निर्जन भूमि की पहचान कर एक इन्वेंट्री बनाई जाएगी जिसे ग्रीन क्रेडिट के तहत पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन के लिए उपयोग किया जाएगा
ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम के उद्देश्य:
ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम का लक्ष्य वृक्षारोपण के लिए एक गत्यात्मक भूमि बैंक स्थापित करना है, जो एक समर्पित वेब पोर्टल के माध्यम से सुलभ होगा। इस सुविधा के तहत राज्य वन विभाग निर्जन वन भूमि को पंजीकृत करके एक सूची तैयार कर सकेंगे, जो स्वैच्छिक वृक्षारोपण पहलों के लिए एक मूल्यवान संसाधन के रूप में कार्य करेगी
वनरोपण प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए पंजीकृत विकल्पों में से वृक्षारोपण ब्लॉक चुनने के लिए सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत पंजीकृत सरकारी संस्थानों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, गैर-सरकारी संगठनों, निजी कंपनियों, जनहितैषीयों,व्यक्तियों और समूहों को प्रोत्साहित करना शामिल है
प्रोग्राम, एक वेब प्लेटफ़ॉर्म और रजिस्ट्री सहित प्रौद्योगिकी-चालित उपकरणों के माध्यम से संचालित होगा। ये डिजिटल संसाधन वृक्षारोपण गतिविधियों के कुशल पंजीकरण, सत्यापन और निगरानी को सक्षम होंगे
वृक्षारोपण के मूर्त और अमूर्त लाभों को मान्यता दे कर, इसमें भाग लेने वाली संस्थाओं को "ग्रीन क्रेडिट" प्रमुख प्रोत्साहन के रूप में प्रदान किए जाएंगे। इन क्रेडिटों का जारी होना प्रशासक द्वारा निर्धारित पद्धतियों और दिशानिर्देशों के अनुसार होगा
लक्ष्य:
भारत के वन और वृक्ष आवरण को बढ़ाना
वन विभागों द्वारा प्रबंधित निर्जन वन भूमि की एक सूची बनाना जो वृक्षारोपण के लिए उपयुक्त हो।
ग्रीन क्रेडिट को प्रतिफल के रूप में पेश करके पर्यावरण के अनुकूल पहलों में भागीदारी को बढ़ावा देना
ग्रीन क्रेडिट सेल की स्थापना
ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम के प्रशासक के रूप में, भारतीय वानिकी अनुसंधान और शिक्षा परिषद ने कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए अधिकारियों और वैज्ञानिकों की एक समर्पित टीम के साथ "ग्रीन क्रेडिट सेल" की स्थापना की है, जिसका मार्गदर्शन महानिदेशक, भा वा अनु एवं शिक्षा परिषद और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग निदेशक द्वारा किया जाएगा
जिम्मेदारियाँ :
कार्यक्रम को लागू करने के लिए दिशानिर्देश, कार्यप्रणाली, मानक, पंजीकरण प्रक्रियाएं विकसित करना
मापन, रिपोर्टिंग और सत्यापन तंत्र स्थापित करना
ग्रीन क्रेडिट पोर्टल की स्थापना और संचालन के लिए दिशानिर्देश तैयार करना
ग्रीन क्रेडिट जारी करने के लिए दिशानिर्देश विकसित करना
राज्य वन विभागों और संबंधित संस्थाओं के साथ समन्वय करना
ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम के समग्र प्रशासन की देखरेख करना
जीसीसी की मुख्य उपलब्धियाँ
एक मजबूत "ग्रीन क्रेडिट सेल" की स्थापना
ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम को लागू करने के लिए एक समर्पित पोर्टल विकसित किया गया
जीसीपी के लिए विभिन्न कार्यप्रणाली और दिशानिर्देशों का निर्माण किया गया
जीसीपी पोर्टल में व्यक्तियों और संस्थाओं का पंजीकरण
स्थापित मापन, रिपोर्टिंग और सत्यापन
कार्यान्वयन राज्य वन विभागों को प्रशिक्षण प्रदान करना
अधिक जानकारी के लिए कृपया विजिट करें:https://moefcc-gcp.in
लोग
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श्रीमती आरती चौधरी, भा.व.से. |
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श्री महालिंग, भा.व.से. |
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अजय कुमार |
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श्री सुमंत्र बसु |
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श्री मुथु प्रसाद टी |
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श्री अश्वथ हेगड़े |
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श्री रवि दत्त |
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श्री नागेन्द्र प्रताप सिंह |
संपर्क
श्रीमती आरती चौधरी, भा.व.से.
निदेशक, ग्रीन क्रेडिट सेल
भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद
पी.ओ. न्यू फॉरेस्ट, देहरादून
(उत्तराखण्ड) – भारत
पिन कोड: 248006
फोन: +91-135-2756497, 2224831 (कार्यालय)
फैक्स: +91-135-2756497
ई-मेल: dir_pic[at]icfre[dot]org
अंतिम बार समीक्षा और अद्यतन की तिथि: 04 Sep 2025

